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mahabharat 12.299.30: जैसे बछड़ा अपनी माता के चारों स्तनों से दूध पीता है, वैसे ही मनुष्य को भी उपर्युक्त सभी गुणों को धारण करना चाहिए। मैंने आज तक सत्य से अधिक पवित्र कोई वस्तु नहीं समझी ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.299.30 
सर्वांश्चैनाननुचरन् वत्सवच्चतुर: स्तनान्।
न पावनतमं किंचित् सत्यादध्यगमं क्वचित् ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जैसे बछड़ा अपनी माता के चारों स्तनों से दूध पीता है, वैसे ही मनुष्य को भी उपर्युक्त सभी गुणों को धारण करना चाहिए। मैंने आज तक सत्य से अधिक पवित्र कोई वस्तु नहीं समझी ॥30॥
 
Just as a calf suckles from all the four breasts of its mother, similarly a man should imbibe all the above-mentioned virtues. Till date I have not understood anything more sacred than truth. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)