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mahabharat 12.299.3: एक समय की बात है, अजन्मा प्रजापति स्वर्णमय हंस के रूप में तीनों लोकों में विचरण कर रहे थे। घूमते-घूमते वे साध्यगणों के पास पहुँचे ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.299.3 
हंसो भूत्वाथ सौवर्णस्त्वजो नित्य: प्रजापति:।
स वै पर्येति लोकांस्त्रीनथ साध्यानुपागमत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, अजन्मा प्रजापति स्वर्णमय हंस के रूप में तीनों लोकों में विचरण कर रहे थे। घूमते-घूमते वे साध्यगणों के पास पहुँचे ॥3॥
 
Once upon a time, the unborn Prajapati was wandering in the three worlds in the form of a golden swan. While roaming around, he reached the Sadhyaganas. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)