Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.299.28: हे प्रभु! जिस पुरुष के जननेन्द्रिय, उदर, दोनों हाथ और वाणी - ये चारों द्वार सुरक्षित हैं, वही धर्म को जानने वाला है।   |   mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.299.28 
चत्वारि यस्य द्वाराणि सुगुप्तान्यमरोत्तमा:।
उपस्थमुदरं हस्तौ वाक् चतुर्थी स धर्मवित् ॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जिस पुरुष के जननेन्द्रिय, उदर, दोनों हाथ और वाणी - ये चारों द्वार सुरक्षित हैं, वही धर्म को जानने वाला है।
 
O Lord! The man whose genitals, abdomen, both hands and speech - all these four doors are safe, he is the one who knows the Dharma. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)