Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.299.26: विद्वान पुरुष को अपमानित होकर भी अमृत पान करने के समान संतुष्ट रहना चाहिए; क्योंकि अपमानित मनुष्य शांति से सोता है, परन्तु अपमान करने वाला नष्ट हो जाता है। | mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अमृतस्येव संतृप्येदवमानस्य पण्डित:।
सुखं ह्यवमत: शेते योऽवमन्ता स नश्यति॥ २६॥
अनुवाद
विद्वान पुरुष को अपमानित होकर भी अमृत पान करने के समान संतुष्ट रहना चाहिए; क्योंकि अपमानित मनुष्य शांति से सोता है, परन्तु अपमान करने वाला नष्ट हो जाता है।
A learned man should be satisfied with being insulted like he is drinking nectar; because an insulted man sleeps peacefully, but the one who insults gets destroyed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥