Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.299.22: जो विद्वान् पुरुष अपने मन को वश में करके उच्च कुल में जन्म लेता है, वह ऊँचा उठाए जाने योग्य स्तम्भ के समान सबके लिए आदर का पात्र हो जाता है और जिसके प्रति सब लोग प्रसन्नतापूर्वक मधुर वचन बोलते हैं, वह मनुष्य दिव्य भाव को प्राप्त होता है ॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो विद्वान् पुरुष अपने मन को वश में करके उच्च कुल में जन्म लेता है, वह ऊँचा उठाए जाने योग्य स्तम्भ के समान सबके लिए आदर का पात्र हो जाता है और जिसके प्रति सब लोग प्रसन्नतापूर्वक मधुर वचन बोलते हैं, वह मनुष्य दिव्य भाव को प्राप्त होता है ॥22॥
The learned man, who controls his mind and is born in a high family, becomes worthy of respect for everyone like a pillar that can be lifted high and towards whom everyone happily speaks sweet words, that person attains the divine feeling. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥