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mahabharat 12.299.18: पापी चाहे आपसे बड़ा हो या आपके बराबर का, उसके द्वारा अपमानित, पीटे और गाली दिए जाने पर भी आपको उसे क्षमा कर देना चाहिए। ऐसा करने वाला मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त होता है ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.299.18 
पापीयस: क्षमेतैव श्रेयस: सदृशस्य च।
विमानितो हतोत्क्रुष्ट एवं सिद्धिं गमिष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पापी चाहे आपसे बड़ा हो या आपके बराबर का, उसके द्वारा अपमानित, पीटे और गाली दिए जाने पर भी आपको उसे क्षमा कर देना चाहिए। ऐसा करने वाला मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त होता है ॥18॥
 
Whether the sinner is older or equal to you, you should forgive him even after being insulted, beaten and abused by him. A person doing this will achieve the ultimate success. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)