Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.299.14: मैं उसे ब्रह्मज्ञानी और ऋषि मानता हूँ जो वाणी के बल, मन और क्रोध के बल, काम के बल, पेट और जननेन्द्रिय के बल को सहन कर सकता है। | mahabharat अध्याय 12.299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं उसे ब्रह्मज्ञानी और ऋषि मानता हूँ जो वाणी के बल, मन और क्रोध के बल, काम के बल, पेट और जननेन्द्रिय के बल को सहन कर सकता है।
I consider him a knower of Brahman and a sage who can tolerate the force of speech, the force of mind and anger, the force of desire, the force of stomach and genitals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥