भीष्मजी कहते हैं - राजन ! बुद्धिमान महात्मा पराशर मुनि से यह सत्य उपदेश सुनकर धर्मात्माओं में श्रेष्ठ राजा जनक बहुत प्रसन्न हुए ॥47॥
Bhishmaji says – King! King Janak, the best among religious people, was very happy after hearing this true sermon from the wise Mahatma Parashar Muni. 47॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पराशरगीतायामष्टनवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पराशरगीताविषयक दो सौ अट्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥