श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.298.47 
भीष्म उवाच
इत्युक्तो जनको राजन् याथातथ्यं मनीषिणा।
श्रुत्वा धर्मविदां श्रेष्ठ: परां मुदमवाप ह॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! बुद्धिमान महात्मा पराशर मुनि से यह सत्य उपदेश सुनकर धर्मात्माओं में श्रेष्ठ राजा जनक बहुत प्रसन्न हुए ॥47॥
 
Bhishmaji says – King! King Janak, the best among religious people, was very happy after hearing this true sermon from the wise Mahatma Parashar Muni. 47॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पराशरगीतायामष्टनवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पराशरगीताविषयक दो सौ अट्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)