Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.298.46: सब मनुष्यों को सुन्दर या कुरूप रूप, योग्य या अयोग्य पुत्र-पौत्रों की वृद्धि, अच्छे या बुरे कुल में जन्म, धन-संचय आदि की प्राप्ति उनके अच्छे या बुरे कर्मों के अनुसार होती है ॥ 46॥ | mahabharat अध्याय 12.298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वरूपतामात्मकृतं च विस्तरं
कुलान्वयं द्रव्यसमृद्धिसंचयम्।
नरो हि सर्वो लभते यथाकृतं
शुभाशुभेनात्मकृतेन कर्मणा॥ ४६॥
अनुवाद
सब मनुष्यों को सुन्दर या कुरूप रूप, योग्य या अयोग्य पुत्र-पौत्रों की वृद्धि, अच्छे या बुरे कुल में जन्म, धन-संचय आदि की प्राप्ति उनके अच्छे या बुरे कर्मों के अनुसार होती है ॥ 46॥
All human beings get beautiful or ugly appearance, expansion of worthy or unworthy sons and grandsons, birth in a good or bad family, accumulation of wealth etc. in accordance with their good or bad deeds. ॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥