श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.298.42 
व्यवसायं समाश्रित्य सहायान् योऽधिगच्छति।
न तस्य कश्चिदारम्भ: कदाचिदवसीदति॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो दृढ़ निश्चय और परिश्रम से योग्य सहायकों को इकट्ठा करता है, उसका कोई भी काम कभी व्यर्थ नहीं जाता ॥ 42॥
 
He who with firm determination and hard work gathers suitable helpers, none of his works ever go to waste. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)