श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.298.40 
माता पुत्र: पिता भ्राता भार्या मित्रजनस्तथा।
अष्टापदपदस्थाने लक्षमुद्रेव लक्ष्यते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
माता, पिता, पुत्र, भाई, पत्नी और मित्र- ये सब सोने के सिक्कों के स्थान पर रखे हुए लाखों रुपयों के समान दिखाई देते हैं ॥40॥
 
Mother, father, son, brother, wife and friends – all of them are seen like lakhs of rupees kept in place of gold coins. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)