श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.298.38 
संकल्पजो मित्रवर्गो ज्ञातय: कारणात्मका:।
भार्या पुत्रश्च दासश्च स्वमर्थमनुयुज्यते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
लोग किसी न किसी संकल्प से ही मित्र बनते हैं; परिवार के लोग भी किसी न किसी कारण से ही एक दूसरे से सम्बन्ध रखते हैं; स्त्री, पुत्र और नौकर-चाकर सभी अपने-अपने स्वार्थ का पालन करते हैं ॥38॥
 
People become friends with some resolve or the other; family members too maintain relationships with each other for some reason; wife, son and servants all follow their own self-interests. ॥38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)