यथा भावावसन्ना हि नौर्महाम्भसि तन्तुना।
तथा मनोभियोगाद् वै शरीरं प्रचिकीर्षति॥ ३३॥
अनुवाद
जैसे गहरे पानी में बंधी हुई नाव, नाविक के विचारों के प्रभाव से रस्सी द्वारा खींची जाने पर चलती है, वैसे ही यह जीव भी अपने मन की इच्छा के अनुसार इस शरीर रूपी नाव को चलाना चाहता है ॥ 33॥
Just as a boat anchored in deep water moves under the influence of the sailor's thoughts when pulled by a rope, similarly, this living being wants to steer this body-like boat according to the desires of his mind. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥