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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर
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श्लोक 31
श्लोक
12.298.31
शयानं यान्तमासीनं प्रवृत्तं विषयेषु च।
शुभाशुभानि कर्माणि प्रपद्यन्ते नरं सदा॥ ३१॥
अनुवाद
मनुष्य चाहे सो रहा हो, बैठा हो, चल रहा हो अथवा विषय-भोगों में लिप्त हो रहा हो, उसके अच्छे-बुरे कर्म सदैव उसके साथ होते रहते हैं ॥31॥
Whether a man is sleeping, sitting, walking or indulging in sensual pleasures, his good and bad deeds always keep happening to him. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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