श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.298.30 
स्वयंकृतानि कर्माणि जातो जन्तु: प्रपद्यते।
नाकृत्वा लभते कश्चित् किंचिदत्र प्रियाप्रियम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जन्म लेकर जीव अपने पूर्वजन्म के कर्मों का फल भोगता है; पूर्वजन्म में कुछ किए बिना यहाँ किसी को भी अच्छा या बुरा फल नहीं मिलता ॥30॥
 
A living being, after taking birth in this world, reaps the fruits of his past deeds; without having done something in his previous life no one receives any good or bad result here. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)