श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.298.3 
पराशर उवाच
असङ्ग: श्रेयसो मूलं ज्ञानं चैव परा गति:।
चीर्णं तपो न प्रणश्येद्वाप: क्षेत्रे न नश्यति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पराशर बोले, "हे राजन! आसक्ति का अभाव ही कल्याण का मूल कारण है। ज्ञान ही सर्वोत्तम मार्ग है। स्वयं किया गया तप और सुपात्र को दिया गया दान - ये कभी नष्ट नहीं होते।"
 
Parashara said, "O King! Absence of attachment is the main reason for good. Knowledge is the best path. Penance done by oneself and charity given to a deserving person - these never get destroyed."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)