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mahabharat 12.298.26: जो मनुष्य शब्द, स्पर्श आदि वस्तुओं का सेवन करता है, वह ब्रह्मानंद के अनुभव से अवश्य ही वंचित रहेगा, परंतु जो वस्तुओं का त्याग करता है, वह अवश्य ही ब्रह्मानंद का अनुभव करने में समर्थ हो सकता है ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.298.26 
विषयानश्नुते यस्तु न स भोक्ष्यत्यसंशयम्।
यस्तु भोगांस्त्यजेदात्मा स वै भोक्तुं व्यवस्यति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य शब्द, स्पर्श आदि वस्तुओं का सेवन करता है, वह ब्रह्मानंद के अनुभव से अवश्य ही वंचित रहेगा, परंतु जो वस्तुओं का त्याग करता है, वह अवश्य ही ब्रह्मानंद का अनुभव करने में समर्थ हो सकता है ॥26॥
 
The person who consumes things like words, touch etc. will definitely be deprived of the experience of Brahmananda, but the one who abandons things, he can definitely be capable of experiencing Brahmananda. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)