मृण्मये भाजने पक्वे यथा वै न श्यति द्रव:।
तथा शरीरं तपसा तप्तं विषयमश्नुते॥ २५॥
अनुवाद
जैसे पके हुए मिट्टी के बर्तन में रखा हुआ जल आदि द्रव पदार्थ न तो रिसता है और न नष्ट होता है, उसी प्रकार तप से तपा हुआ सूक्ष्म शरीर ब्रह्मलोक तक के विषयों का अनुभव कर सकता है॥ 25॥
Just as liquid substances such as water kept in a baked earthen pot neither get leaked nor get destroyed, similarly the subtle body heated by austerities can experience the objects even up to the Brahmaloka.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥