श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.298.24 
अधस्तिर्यग्गतिं चैव स्वर्गे चैव परां गतिम्।
प्राप्नोति स्वकृतैरात्मा प्राज्ञस्येहेतरस्य च॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में चाहे कोई बुद्धिमान हो या मूर्ख, उसकी आत्मा अपने कर्मों के अनुसार नरक में, पशु-पक्षी योनियों में, स्वर्ग में तथा परम गति को जाती है ॥24॥
 
In this world, whether intelligent or foolish, his soul goes to hell, to animal and bird species, to heaven and to the ultimate destination according to the deeds done by him. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)