Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.298.23: जो मनुष्य दूसरों के लिए अर्थात् बाह्य इन्द्रियों की तृप्ति के लिए विषय-भोगों में लिप्त रहता है और इसे ही अपना मुख्य कर्तव्य मानता है, वह अपने वास्तविक कर्तव्य से विमुख हो जाता है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य दूसरों के लिए अर्थात् बाह्य इन्द्रियों की तृप्ति के लिए विषय-भोगों में लिप्त रहता है और इसे ही अपना मुख्य कर्तव्य मानता है, वह अपने वास्तविक कर्तव्य से विमुख हो जाता है ॥23॥
He who indulges in sensual pleasures for the sake of others, i.e., for the gratification of the external senses, and considers this as his main duty, deviates from his real duty. ॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥