मन: प्रणयतेऽऽत्मानं स एनमभियुञ्जति।
युक्तो यदा स भवति तदा तं पश्यते परम्॥ २२॥
अनुवाद
मन आत्मा को योग की ओर ले जाता है। योगी मन को योग में लीन (आत्मा में लीन) कर देता है। इस प्रकार जब वह योग में सिद्धि प्राप्त कर लेता है, तब उसे परब्रह्म का साक्षात्कार हो जाता है ॥22॥
The mind leads the soul towards yoga. The yogi makes the mind absorbed in yoga (absorbed in the soul). In this way, when he attains perfection in yoga, then he realizes the Supreme Being. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥