वीतरागो जितक्रोध: सम्यग् भवति य: सदा।
विषये वर्तमानोऽपि न स पापेन युज्यते॥ १०॥
अनुवाद
परंतु जो पुरुष अनासक्त होकर क्रोध को जीत लेता है और सदा सदाचार का पालन करता है, वह भौतिक पदार्थों में स्थित होकर भी पापकर्मों में संलिप्त नहीं होता ॥10॥
But he who, being detached, conquers anger and always follows virtuous conduct, does not associate himself with sinful acts even while being present in material things. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥