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mahabharat 12.297.5: लेकिन राजा को युद्ध के मैदान में उस क्षत्रिय राजकुमार को हराने का प्रयास करना चाहिए जिसके पास युद्ध के उपकरण हों, जो युद्ध के लिए तैयार हो और उसके बराबर का हो।   |   mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.297.5 
पारिबर्है: सुसंयुक्तमुद्यतं तुल्यतां गतम्।
अतिक्रमेत् तं नृपति: संग्रामे क्षत्रियात्मजम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
लेकिन राजा को युद्ध के मैदान में उस क्षत्रिय राजकुमार को हराने का प्रयास करना चाहिए जिसके पास युद्ध के उपकरण हों, जो युद्ध के लिए तैयार हो और उसके बराबर का हो।
 
But the king must try to defeat on the battlefield the Kshatriya prince who has the war equipment, is prepared for the war and is his equal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)