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mahabharat 12.297.40: नरेश्वर! धर्मशास्त्र और वेद छह अंगों सहित पुण्य कर्म करने वाले मनुष्य के कल्याण के लिए ही कर्तव्यों का विधान करते हैं ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.297.40 
धर्मशास्त्राणि वेदाश्च षडङ्गानि नराधिप।
श्रेयसोऽर्थे विधीयन्ते नरस्याक्लिष्टकर्मण:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! धर्मशास्त्र और वेद छह अंगों सहित पुण्य कर्म करने वाले मनुष्य के कल्याण के लिए ही कर्तव्यों का विधान करते हैं ॥40॥
 
Nareshwar! The Dharmashastras and the Vedas along with the six parts prescribe duties only for the welfare of the man who performs virtuous deeds. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)