Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.297.33: ‘हे प्रभु! हमें क्या उपाय करना चाहिए जिससे हमें इस मनुष्य योनि से नीचे न गिरना पड़े’, ऐसा विचार करके तथा वैदिक प्रमाणों का विचार करके मनुष्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं ॥33॥ | mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं न विप्रणश्येम योनितोऽस्या इति प्रभो।
कुर्वन्ति धर्मं मनुजा: श्रुतिप्रामाण्यदर्शनात्॥ ३३॥
अनुवाद
‘हे प्रभु! हमें क्या उपाय करना चाहिए जिससे हमें इस मनुष्य योनि से नीचे न गिरना पड़े’, ऐसा विचार करके तथा वैदिक प्रमाणों का विचार करके मनुष्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं ॥33॥
After thinking, 'O Lord! What measures should we take so that we do not have to fall down from this human form' and considering the Vedic evidences, men perform religious rituals. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥