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mahabharat 12.297.32: क्योंकि, हे पृथ्वी के स्वामी! मनुष्य जन्म ही एकमात्र ऐसा अद्वितीय जन्म है, जिसमें अच्छे कर्म करके आत्मा मुक्त हो सकती है ॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.297.32 
इयं हि योनि: प्रथमा यां प्राप्य जगतीपते।
आत्मा वै शक्यते त्रातुं कर्मभि: शुभलक्षणै:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि, हे पृथ्वी के स्वामी! मनुष्य जन्म ही एकमात्र ऐसा अद्वितीय जन्म है, जिसमें अच्छे कर्म करके आत्मा मुक्त हो सकती है ॥ 32॥
 
Because, O Lord of the Earth! The human birth is the only unique birth in which the soul can be liberated by performing good deeds. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)