Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.297.31: हे प्रिये! यदि मनुष्य भोग के साधनों से वंचित भी हो जाए, तो भी उसे अपने को हीन नहीं समझना चाहिए। यदि वह चाण्डाल की योनि में भी मनुष्य योनि में जन्म ले, तो भी वह मनुष्येतर योनि में जन्म लेने से कहीं अधिक श्रेष्ठ है ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रिये! यदि मनुष्य भोग के साधनों से वंचित भी हो जाए, तो भी उसे अपने को हीन नहीं समझना चाहिए। यदि वह चाण्डाल की योनि में भी मनुष्य योनि में जन्म ले, तो भी वह मनुष्येतर योनि में जन्म लेने से कहीं अधिक श्रेष्ठ है ॥31॥
O dear! Even if a man is deprived of the means of enjoyment, he should not consider himself inferior. Even if he is born as a human being in the womb of a Chandala, it is far better than being born as a non-human being. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥