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mahabharat 12.297.3: यदि कोई क्षत्रिय पुत्र युद्ध में घायल होकर बाणों की चिता पर जल जाए, तो वह देवताओं के लोक में जाता है और वहाँ स्वर्गीय सुख भोगता है।   |   mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.297.3 
रणाजिरे यत्र शराग्निसंस्तरे
नृपात्मजो घातमवाप्य दह्यते।
प्रयाति लोकानमरै: सुदुर्लभान्
निषेवते स्वर्गफलं यथासुखम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई क्षत्रिय पुत्र युद्ध में घायल होकर बाणों की चिता पर जल जाए, तो वह देवताओं के लोक में जाता है और वहाँ स्वर्गीय सुख भोगता है।
 
If a Kshatriya's son gets injured in a battle and gets burnt on a pyre of arrows, then he goes to the worlds of gods and enjoys heavenly pleasures there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)