श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.297.27 
ऊर्ध्वं भित्त्वा प्रतिष्ठन्ते प्राणा: पुण्यवतां नृप।
मध्यतो मध्यपुण्यानामधो दुष्कृतकर्मणाम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राजा! पुण्यात्मा पुरुषों के जीव ब्रह्मरन्ध्र से निकलते हैं। जिनके पुण्य कर्म मध्यम श्रेणी के हैं, उनके जीव मध्य द्वार (मुख, नेत्र आदि) से निकलते हैं और जिन्होंने केवल पाप ही किए हैं, उनके जीव नीचे के छिद्र (गुदा या लिंग) से निकलते हैं॥ 27॥
 
King! The souls of virtuous men come out through the Brahmarandhra. Those whose pious deeds are of the middle category, their souls come out through the middle door (mouth, eyes etc.) and those who have committed only sins, their souls come out through the lower hole (anus or penis).॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)