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mahabharat 12.297.25: तथापि, विषपान, फाँसी, अग्नि में जलाना, डाकुओं के हाथों या दांत वाले पशुओं के आक्रमण से हत्या करना, ये सभी निम्नतम श्रेणी के माने गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.297.25 
विषमुद्‍बन्धनं दाहो दस्युहस्तात् तथा वध:।
दंष्ट्रिभ्यश्च पशुभ्यश्च प्राकृतो वध उच्यते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तथापि, विषपान, फाँसी, अग्नि में जलाना, डाकुओं के हाथों या दांत वाले पशुओं के आक्रमण से हत्या करना, ये सभी निम्नतम श्रेणी के माने गए हैं।
 
However, killing by consuming poison, hanging, burning in fire, the hands of robbers or by the attack of animals having teeth are all considered to be of the lowest category. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)