Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.297.15: अध्यात्म तत्त्व का चिंतन करने वाले बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि इस शरीर के अन्त में अर्थात् बाह्य भाग में केवल त्वचा है। वह भी सौन्दर्य आदि गुणों से रहित है। इसकी मृत्यु अवश्यम्भावी है। 15॥ | mahabharat अध्याय 12.297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अध्यात्म तत्त्व का चिंतन करने वाले बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि इस शरीर के अन्त में अर्थात् बाह्य भाग में केवल त्वचा है। वह भी सौन्दर्य आदि गुणों से रहित है। इसकी मृत्यु अवश्यम्भावी है। 15॥
Wise men who contemplate on the spiritual principle say that at the end of this body i.e. in the outer part there is only skin. It is also devoid of qualities like beauty etc. Its death is inevitable. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥