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mahabharat 12.296.36: पराशर बोले, "महाराज! आप जिन कर्मों के विषय में पूछ रहे हैं, मैं उन्हें बताता हूँ। मेरी बात सुनिए। जो कर्म हिंसा से रहित हैं, वे सदैव मनुष्य की रक्षा करते हैं।"   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.296.36 
पराशर उवाच
शृणु मेऽत्र महाराज यन्मां त्वं परिपृच्छसि।
यानि कर्माण्यहिंस्राणि नरं त्रायन्ति सर्वदा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
पराशर बोले, "महाराज! आप जिन कर्मों के विषय में पूछ रहे हैं, मैं उन्हें बताता हूँ। मेरी बात सुनिए। जो कर्म हिंसा से रहित हैं, वे सदैव मनुष्य की रक्षा करते हैं।"
 
Parashara said, "Maharaj! I will tell you about the deeds you are asking about. Listen to me. Those deeds which are free from violence always protect a man."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)