Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.296.33: जो जाति और कर्म दोनों से श्रेष्ठ है और पापकर्मों में लिप्त नहीं होता तथा जो जाति से दूषित होकर भी पापकर्म नहीं करता, वह मनुष्य कहलाने योग्य है ॥33॥ | mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जात्या च कर्मणा चैव दुष्टं कर्म न सेवते।
जात्या दुष्टश्च य: पापं न करोति स पूरुष:॥ ३३॥
अनुवाद
जो जाति और कर्म दोनों से श्रेष्ठ है और पापकर्मों में लिप्त नहीं होता तथा जो जाति से दूषित होकर भी पापकर्म नहीं करता, वह मनुष्य कहलाने योग्य है ॥33॥
He who is superior to both caste and action and does not indulge in sinful acts, and who despite being contaminated by caste does not commit sinful acts, is worthy of being called a man. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥