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mahabharat 12.296.32: पराशर बोले, "महाराज! इसमें संदेह नहीं कि कर्म और जाति दोनों ही दोषकारक हैं; किन्तु मैं तुम्हें इसके विषय में विशेष बात बताता हूँ। सुनो।"   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.296.32 
पराशर उवाच
असंशयं महाराज उभयं दोषकारकम्।
कर्म चैव हि जातिश्च विशेषं तु निशामय॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पराशर बोले, "महाराज! इसमें संदेह नहीं कि कर्म और जाति दोनों ही दोषकारक हैं; किन्तु मैं तुम्हें इसके विषय में विशेष बात बताता हूँ। सुनो।"
 
Parashara said, "Maharaj! There is no doubt that both karma and caste are fault-causing; but I will tell you the special thing about this. Listen."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)