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mahabharat 12.296.3: पराशर बोले, 'महाराज! यह सत्य है कि मनुष्य उसी से उत्पन्न होता है, तथापि तपस्या के अभाव में लोग नीची जाति में गिर गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.296.3 
पराशर उवाच
एवमेतन्महाराज येन जात: स एव स:।
तपसस्त्वपकर्षेण जातिग्रहणतां गत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पराशर बोले, 'महाराज! यह सत्य है कि मनुष्य उसी से उत्पन्न होता है, तथापि तपस्या के अभाव में लोग नीची जाति में गिर गए हैं।
 
Parashara said, 'Maharaj! It is true that a person is born from the same person, however, due to lack of penance, people have fallen into a low caste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)