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mahabharat 12.296.25: नरश्रेष्ठ! ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य - ये तीन वर्ण द्विजाति कहलाते हैं। उपर्युक्त धर्मों में इनका ही अधिकार है।   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.296.25 
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्यास्त्रयो वर्णा द्विजातय:।
अत्र तेषामधीकारो धर्मेषु द्विपदां वर॥ २५॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य - ये तीन वर्ण द्विजाति कहलाते हैं। उपर्युक्त धर्मों में इनका ही अधिकार है।
 
Narashrestha! Brahmin, Kshatriya and Vaishya – these three castes are called double caste. They have authority in the above mentioned religions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)