Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.296.23-24: क्रूरता (दया) का अभाव, अहिंसा, सतर्कता (सावधानी), देवताओं और पितरों को अपना भाग समर्पित करना या दान देना, श्राद्धकर्म करना, अतिथियों का सत्कार करना, सत्य, अक्रोध, अपनी पत्नी से संतुष्ट रहना, पवित्रता बनाए रखना, किसी के दोष न देखना, आत्मज्ञान और सहनशीलता - ये सभी वर्णों के सामान्य कर्तव्य हैं। | mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रूरता (दया) का अभाव, अहिंसा, सतर्कता (सावधानी), देवताओं और पितरों को अपना भाग समर्पित करना या दान देना, श्राद्धकर्म करना, अतिथियों का सत्कार करना, सत्य, अक्रोध, अपनी पत्नी से संतुष्ट रहना, पवित्रता बनाए रखना, किसी के दोष न देखना, आत्मज्ञान और सहनशीलता - ये सभी वर्णों के सामान्य कर्तव्य हैं।
Absence of cruelty (kindness), non-violence, vigilance (caution), dedicating one's share to the gods and ancestors or giving charity, performing Shraddha rituals, hospitality to guests, truth, non-anger, being satisfied with one's own wife, maintaining purity, never seeing anyone's faults, self-knowledge and tolerance - these are the common duties of all the castes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥