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mahabharat 12.296.22: महाराज! ये वर्णों के विशेष कर्तव्य हैं। पिताश्री! अब आप मुझसे उनके सामान्य कर्तव्यों के विषय में विस्तारपूर्वक सुनिए।   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.296.22 
विशेषधर्मा नृपते वर्णानां परिकीर्तिता:।
धर्मान् साधारणांस्तात विस्तरेण शृणुष्व मे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ये वर्णों के विशेष कर्तव्य हैं। पिताश्री! अब आप मुझसे उनके सामान्य कर्तव्यों के विषय में विस्तारपूर्वक सुनिए।
 
Maharaj! These are the special duties of the Varnas. Father! Now listen to me in detail about their general duties.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)