Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.296.21: नरेश्वर! कृषि, पशुपालन और व्यापार - ये वैश्यों के कर्तव्य हैं और द्विजातियों की सेवा शूद्रों का कर्तव्य है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.296.21 
कृषिश्च पाशुपाल्यं च वाणिज्यं च विशामपि।
द्विजानां परिचर्या च शूद्रकर्म नराधिप॥ २१॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! कृषि, पशुपालन और व्यापार - ये वैश्यों के कर्तव्य हैं और द्विजातियों की सेवा शूद्रों का कर्तव्य है ॥21॥
 
Nareshwar! Agriculture, animal husbandry and trade – these are the duties of Vaishyas and service to the double castes is the duty of Shudras. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)