Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.296.2: श्रुति कहती है कि जिससे बालक उत्पन्न होता है, वह उसी रूप का माना जाता है अर्थात् जो पिता बालक को जन्म देता है, वही बालक के रूप में नया जन्म लेता है। ऐसी स्थिति में ब्रह्माजी से उत्पन्न ब्राह्मणों से ही आदि में सब उत्पन्न हुए, फिर उन्हें क्षत्रिय आदि विशेष नाम कैसे मिले?॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदेतज्जायतेऽपत्यं स एवायमिति श्रुति:।
कथं ब्राह्मणतो जातो विशेषग्रहणं गत:॥ २॥
अनुवाद
श्रुति कहती है कि जिससे बालक उत्पन्न होता है, वह उसी रूप का माना जाता है अर्थात् जो पिता बालक को जन्म देता है, वही बालक के रूप में नया जन्म लेता है। ऐसी स्थिति में ब्रह्माजी से उत्पन्न ब्राह्मणों से ही आदि में सब उत्पन्न हुए, फिर उन्हें क्षत्रिय आदि विशेष नाम कैसे मिले?॥2॥
Shruti says that the one from whom the child is born is considered to be of the same form i.e. the father who gives birth to the child takes a new birth in the form of the child. In such a situation, everyone was born from the Brahmins born from Brahmaji in the beginning, then how did they get special names like Kshatriya etc.?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥