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mahabharat 12.296.13: हे मनुष्यों के स्वामी! ऋषियों ने भिन्न-भिन्न स्थानों में बहुत से पुत्र उत्पन्न किए और अपनी-अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से उन सबको ऋषि बना दिया ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.296.13 
उत्पाद्य पुत्रान् मुनयो नृपते यत्र तत्र ह।
स्वेनैव तपसा तेषामृषित्वं विदधु: पुन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! ऋषियों ने भिन्न-भिन्न स्थानों में बहुत से पुत्र उत्पन्न किए और अपनी-अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से उन सबको ऋषि बना दिया ॥13॥
 
O Lord of men! The sages produced many sons in different places and made all of them sages by their own spiritual powers. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)