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जनक उवाच
ब्रह्मणैकेन जातानां नानात्वं गोत्रत: कथम्।
बहूनीह हि लोके वै गोत्राणि मुनिसत्तम॥ १०॥
अनुवाद
जनक ने पूछा - हे महामुनि! जब ब्रह्मा ही सबको जन्म देने वाले हैं, तो मनुष्यों के भिन्न-भिन्न गोत्र कैसे हुए? इस संसार में मनुष्यों के अनेक गोत्र सुने जाते हैं॥ 10॥
Janaka asked - O great sage! When Brahma is the only one who gave birth to all, then how did humans have different gotras? In this world, many gotras of humans are heard.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥