जैसे सभी नदियाँ और जलधाराएँ समुद्र में मिल जाती हैं, वैसे ही सभी आश्रम गृहस्थ का ही आश्रय लेते हैं ॥39॥
Just as all the rivers and streams merge into the ocean, similarly all the ashramas take support of the householder only. ॥ 39॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पराशरगीतायां पञ्चनवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पराशरगीताविषयक दो सौ पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥