श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.295.38 
सर्वात्मनानुकुर्वीत गृहस्थ: कर्मनिश्चयम्।
दाक्ष्येण हव्यकव्यार्थं स्वधर्मे विचरन् नृप॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! गृहस्थों को चाहिए कि वे अपने कर्तव्यों का पूर्ण निश्चय करके स्वधर्म का पालन करें तथा यज्ञ, श्राद्ध आदि अनुष्ठान कुशलतापूर्वक करें ॥38॥
 
Nareshwar! Householders should fully resolve their duties and follow their own dharma and perform rituals like Yagya, Shraddha etc. efficiently. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)