श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.295.34 
तत: फलार्थं सर्वस्य भवन्ति ज्यायसे गुणा:।
धर्मवृत्त्या च सततं कामार्थाभ्यां न हीयते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अतः प्रत्येक बुद्धिमान पुरुष के मन में मोक्षरूपी उत्तम फल की प्राप्ति के लिए शम-दम आदि गुण उत्पन्न होते हैं। धर्म का निरन्तर पालन करने से मनुष्य कभी भी धन और सुखों से वंचित नहीं रहता। 34॥
 
Therefore, qualities like Sham-Dum etc. are generated in the mind of every wise man to attain the best result of salvation. By continuously following Dharma, a person is never deprived of wealth and pleasures. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)