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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश
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श्लोक 31
श्लोक
12.295.31
सुखे तु वर्तमानो वै दु:खे वापि नरोत्तम।
सुवृत्ताद् यो न चलते शास्त्रचक्षु: स मानव:॥ ३१॥
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! जो सुख-दुःख में भी सदाचार से विचलित नहीं होता, वही शास्त्रों का ज्ञाता है।
Narashrestha! The one who never deviates from good conduct, whether in happiness or sorrow, is the knower of the scriptures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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