श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.295.29 
अप्रियाण्यवमानांश्च दु:खं बहुविधात्मकम्।
फलार्थी तत्फलं त्यक्त्वा प्राप्नोति विषयात्मकम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी इच्छा के अनुसार फल की इच्छा करता है, वह स्वार्थपूर्वक कर्म करके अप्रसन्नता, अपमान और नाना प्रकार के दुःखों को प्राप्त करता है; किन्तु उस फल का त्याग करके वह सम्पूर्ण पदार्थों की आत्मा, परब्रह्म परमेश्वर को प्राप्त होता है ॥29॥
 
A man who desires a result in accordance with his wishes, by performing selfish actions, receives displeasure, insult and various kinds of suffering; but by abandoning that result, he attains the Supreme Brahma, the Supreme God, who is the soul of all objects. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)