श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.295.24 
सुखितो दु:खितो वापि नरो लोभं परित्यजेत्।
अवेक्ष्य मनसा शास्त्रं बुद्धॺा च नृपसत्तम॥ २४॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ! मनुष्य चाहे सुख में हो या दुःख में, उसे मन और बुद्धि से शास्त्रों के सिद्धांतों को समझना चाहिए और लोभ का त्याग कर देना चाहिए॥24॥
 
The best! Whether a person is in happiness or sorrow, he should understand the principles of the scriptures with his mind and intellect and give up greed. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)