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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश
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श्लोक 21
श्लोक
12.295.21
मनोऽनुकूला: प्रमदा रूपवत्य: सहस्रश:।
वास: प्रासादपृष्ठे च तत् सर्वं तपस: फलम्॥ २१॥
अनुवाद
हजारों सुन्दर कन्याएँ जो इच्छानुसार आचरण करती हैं और महलों आदि में निवास करती हैं, ये सब तपस्या का ही फल हैं ॥21॥
Thousands of beautiful girls who behave as per one's wishes and residence in palaces etc. are all the results of austerity. ॥21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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