श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.295.20 
कौशिकानि च वस्त्राणि शुभान्याभरणानि च।
वाहनासनपानानि तत् सर्वं तपस: फलम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
रेशमी वस्त्र, सुन्दर आभूषण, वाहन, आसन और स्वादिष्ट भोजन आदि सभी तपस्या के फल हैं।
 
Silk clothes, beautiful ornaments, vehicles, seats and delicious food etc. are all the fruits of austerity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)